अर्थराइटिस रोग, इसके लक्षण और रोग की पहचान |

अर्थराइटिस रोग, इसके लक्षण और रोग की पहचान |

अर्थराईटिस  : इस रोग को गठिया के नाम से भी जाना जाता है और आयुर्वेद में इसे वातरक्त भी कहते हैं, अर्थराईटिस इस रोग के होने पर पुरे रीर में दर्द रहने लग जाता है, खास कर जोड़ों में ज्यादा दर्द रहता है |

जब शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा अधिक बढ़ जाती तो यह रोग हो जाता है, यूरिक एसिड एक प्रकार का विषैला तत्व है यूरिक एसिड का निर्माण उस समय होता है जब शरीर में प्यूरिन न्यूक्लियटाइड का निर्माण होता है जो की गलत रूप से अपचय (Catabolise) होती है ,यह रक्त धातु और वात के कुपित हो जाने के कारण उत्पन्न होता है |

आधुनिक विज्ञान के अनुसार खून में यूरिक एसिड की अधिक मात्रा होने से गठिया/अर्थराईटिस रोग हो जाता है, उम्र बढ़ने के साथ रोग भी बढ़ जाता है, भोजन में शामिल खाद्य पदार्थों के कारण जब शरीर में यूरिक एसिड अधिक बनता है तब गुर्दे उन्हें ख़त्म नहीं कर पाते सामान्यतः किडनी इस विषैले तत्व को मूत्र के साथ शरीर से बहार निकाल देता है |

किसी कारण जब किडनी की काम करने की क्षमता कम हो जाती है, जिसके कारण रक्त में यूरिक एसिड ज्यादा बढ़ जाता है और शरीर के अलग अलग जोड़ों में युरेटल क्रिस्टल जमा हो जाता है, इसी वजह से जोड़ों में दर्द से रोगी का बुरा हाल रहता है, इस रोग में रात को जोड़ों में दर्द बढ़ जाता है और सुबह अकडन महसूस होती है जोड़ों में सूजन आने लगती है तथा उस सूजन में दर्द होने लगता है |

गठिया या आर्थराइटिस होने पर पुरे बदन में दर्द, जोड़ों में दर्द और अकडन इसके अलावा हाथ, पैर और घुटनों में सूजन रहने लग जाती है और रोगी को हाथ पैर के हिलाने पर तीव्र पीड़ा का एहसास होता है |

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अर्थराइटिस के लक्षण

  • गठिया रोग का असर सबसे पहले पैरों में देखने को मिलता है|
  • अंगूठों पर सोजन आ जाता है और वो तब तक ठीक नहीं होता है जब तक उसका ईलाज नहीं करवाया जाए |
  • जोड़ों में दर्द और अकडन रहने लग जाती है |
  • जोड़ों में यूरिक एसिड के बढ़ जाने के कारण सूजन, दर्द और जकड़न रहने लग जाती है |
  • जोड़ों को छूने पर अधिक पीड़ा होती है |
  • पीड़ित जोड़ की त्वचा लाल रंग की दिखने लगती है |
  • कभी कभी जोड़ों के आकार में भी विकृति देखने को मिलती है |
  • कलाई, कोहनी, कंधे और टखनो के मोड़ने में भी दिक्कत महसूस होती है |
  • लगातार बुखार और कब्ज़ की रोग भी हो जाता है और रोगी को बहुत अधिक प्यास भी लगती है |
  • गठिया रोग में रोगी के हाथों पावों में गाँठें बनने लगती है यह गठिया रोग की चरम सीमा होती है |
  • आर्थराइटिस रोग की जाँच
  • इस रोग की जाँच के लिए शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा को चेक किया जाता है, इसके लिए रक्त का सैंपल लेकर उसमें यूरिक एसिड की जाँच की जाती है |

पुरुषों के रक्त जाँच में अगर यूरिक एसिड की मात्रा 7.2 mg/dl से अधिक हो तो आर्थराइटिस रोग का होना माना जाता है |

वहीँ महिलाओं में अगर यूरिक एसिड की मात्रा 6.1 mg/dl से अधिक पाया पाया जाए तो समझना आर्थराइटिस रोग है |

उम्मीद है हमारे द्वारा दी गई जानकारी आपको पसंद आई होगी, इसके अगले संस्करण में हम आपको आर्थराइटिस रोग के उपचार और इसमें क्या खाना चाहिए और किन चीजों से बचना चाहिए के बारे में बतायेंगें |

Written by : Dr. Mohammad Mustafa

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