Sunday, April 22, 2018
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सर्वाइकल के कारण लक्षण और उपचार 

सर्वाइकल

सर्वाइकल के कारण लक्षण और उपचार

सर्वाइकल को हिंदी में  ग्रीवा कशेरुकासंधिशोथ भी कहते हैं | मेरुदंड (back bone) के सबसे उपरी भाग को सर्वाइकल रीजन कहते हैं |जब गर्दन के आसपास की हड्डियों की असामान्य बढ़ोतरी  होती है, जिसे ऑस्टियोफाइट कहते हैं एंव इनके   जोड़ों के बीच (intervertebral disc) के कुशनो में  में कैल्शियम के डी-जनरेशन, बही:क्षेपण या अपने स्थान से सरकने की वजह से  गर्दन  में दर्द  रहने लग जाता है | साथ में कशेरुकाओं के (Apophyseal Joint) में ऑस्टियोअर्थराइटिस यानी पुरानी सूजन (Choronic Inflammation) आ जाती है | इस अवस्था में स्पाइनल कॉर्ड और उसकी शाखाओं पर दबाव बढ़ने लग जाता है | इसी स्थिती को सर्वाइकल कहते हैं |

सर्वाइकल की जांच 

सामान्यत: गर्दन का दर्द 3 से 4 दिन में चला जाता है किसी किसी स्थिती में 10 से 12 दिन भी लग जाते हैं| अगर दर्द ज्यादा समय तक रहे तो डॉक्टर से जरुर चेकउप करवलें |

यदि जांच करने के बाद गर्दन की हड्डियाँ C1, C2, C3, C4, C5 क्लेविकल और स्केपुला सहित कंधो के जोड़ों में दर्द होतो यह Spondylitis का सूचक है |

सर्वाइकल के लक्षण

सर्वाइकल में सामन्यतय डी-गेनेरेटिव परिवर्तन वाले व्यक्तियों में यह लक्षण ज्यादा दिखाई नहीं देते परन्तु जब सर्वाइकल नस या मेरुदंड पर दबाव बनाने लगे तब पीड़ा उत्पन्न होती है | सर्वाइकल के कारन होने वाले लक्षण कुछ इस प्रकार है –

  • गर्दन में अकडन जिससे गर्दन के हिलाने में परेशानी का उत्पन्न होना |
  • सर में चक्कर आना और उल्टियाँ होना |
  • गर्दन का दर्द बाजु और कंधो तक चला जाता है |
  • मांसपेशियां कमजोर हो जाती है जिससे कंधे, बांह और हाथों की मश्पेशियों की क्षति हो जाती है |
  • शरीर के निचे के भागों में कमजोरी का महसूस होना |

सर्वाइकल होने के कारन

  • गर्दन में झटका लगना या चोट आने पर |
  • ज्यादा देर तक कंप्यूटर पर बेठे रहने पर |
  • intervertebral  disc के कुशनों के बीच में कैल्शियम का डी-जनरेशन |
  • ज्यादा उंचा तकिया लगाना |
  • फ़ास्ट फ़ूड का ज्यादा इस्तेमाल करना |

रोकथाम के उपाय

सर्वाइकल से बचने के लिए हमे अपनी दिनचर्या को सुधारना होगा| रोजाना सुबह हलके व्यायाम करना चाहिए | अच्छा पोष्टिक आहार लेना चाहिए| जयादा देर तक कंप्यूटर पर ना बेठें बीच बीच में थोडा रेस्ट कर लें | सोते समय सर के निचे ज्यादा मोटा तकिया न लगायें |

भोजन द्वारा सर्वाइकल का उपचार 

 

Healthy Foods

एक अच्छा पोष्टिक आहार हमारे शरीर को ताकत देता है जिसे हमारे शरीर की मांसपेशियां मजबूत होती है | हमे अपने खाने को संतुलित करना चाहिए खाने में सलाद, फल, उबली सब्जियां, सूखे फल | लहसून के तेल की मालिश भी दर्द में काफी आराम देती है | 

होमियोपैथी चिकित्सा

  • सर्वाइकल में होमियोपैथी की प्रमुख औषधियां सिमिसिफ्युगाचेलीडोनियम मेंजससिक्युटा है |
  • सिमिसिफ्युगा रेसीमोसा (एक्टिया रेसीमोसा ) 30, 200 -गर्दन तथा पीठ में अकडन होने पर |
  • सिक्युटा विरोसा 30, 200 – गर्दन की पशियों में संकुचन और चक्कर आना |
  • कोनियम मेक 200, 1M – चक्कर आना मेरुदंड में मोच लगना हाथ या अँगुलियों में सुनापण महसूस होना|

होमियोपैथी औषधियां आप किसी अच्छे होमियोपैथी चिकित्सक से दिखाकर ही लें  |

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सर्वाइकल के कुछ प्रमुख व्यायाम और आसन

दवाओं से ज्यादा इस बीमारी में व्यायाम और आसन बहुत लाभदायक है | यह शारीर के रक्त प्रवाह के संचारण को सही करता है और नाड़ियों को शक्ति प्रदान करता है | सर्वाइकल के लिए सबसे पहला जो आसन करना चाहिए वो है

1 नाड़ीशोधन प्राणायाम (अनुलोम विलोम)

विधि :-  सबसे पहले खुली हवा में दरी बिछाकर पलथी मारकर  बैठ जाएँ और अपनी कमर को सिधा रखें| अब दाहिने हाथ के अंगूठे से नाक के दायें छेद को बंद करें और बाएँ नाक से सांस अन्दर की और धीरे धीरे खींचे और फिर बंद नाक यानि के दाएँ नाक को धीरे धीरे खोलते हुए उससे साँस को बहार की और धीरे धीरे छोडें | इसी प्रकार अब बाएँ हाथ के अंगूठे से नाक के बाएं छेड़ को बंद करें और दायें नाक से सांस अंदर की ओर धीरे धीरे खींचे और फिर बंद नाक यानि बायीं नाक को धीरे धीरे खोलते हुए उससे साँस को बहार की और छोडें | इस प्रकार यह एक चक्कर पूरा हो जाता है, इस चक्र को 10 से 12 बार करें | यह प्राणायाम सुबह जल्दी उठ कर ही करें |

2 मकरासन

विधि :- पेट के बल लेट जाएँ कोहनियों को निचे रखे हुए सर को ऊपर कर गालों के दोनों और दोनों हाथों की हथेलियों को ठोडी के निचे रख कर दो से पांच मिनट तक इस इस्थिति में रहे | ठोड़ी को ऊपर उठाये रखें, कोहनियों और पेरों को मिलाकर रखें |

3 भुजंगासन ( Cobra Pose) :- इसका दूसरा नाम कोबरा पोज़ भी है | इस आसन के जितने लाभ गिनाएं जाएँ उतने कम है | इस आसन में सर से लेकर पांओ तक लाभ पहुँचता है |

विधि :-  पेट के बल लेट जाएँ| अब अपनी हथेली को कंधे की सीध में लायें पैरों के बीच की दुरी को कम करें और पैरों को सीधा और तना हुआ रखें | अब सांस लेते हुए शरीर के अगले भाग को नाभि तक उठाएं | ध्यान रहे कमर पर ज्यादा खिंचाव न आने पाएं | अब स्वांस को धीरे धीरे अंदर ले और धीरे धीरे बहार छोडें | गहरी स्वांस छोड़ते हुए अपनी पहली अवस्था में आजाएं | इस प्रकार यह एक चक्र हो जाता है | इसे तीन से पांच बार करें |

4 सिंहासन

विधि :– सबसे पहले आप पैरों के पंजो को आपस में मिलाकर बैठ जाएँ | दोनों एडियों को अंडकोष के निचे  इसप्रकार मिलकर रखें की दाई एडी बाईं ओर और बाईं एडी दाई ओर रहे और इन्हें उपर की ओर मोड़ लें | पिंडलीकी हड्डी का आगे का भाग जमीन पर रखें और  हाथों को  ज़मीन पर रख लें |मुह खुला रखे और जितना संभव हो जीभ को बाहर निकाल लें | आँखों को  पूरी तरह खोलिय और अब आसमान की ओर देखिये| नाक से स्वांस लें अब  स्वांस  को धीरे धीरे छोड़ते हुए स्थिर शेर की तरह आवाज निकालें | इसे सिंहासन कहते हैं | इसतरह एक चक्र पूरा होता है आप इसे 5 से 10 बार रोजाना करें |

5 गर्दन को दाएँ से बाएँ घुमाना

विधी :– इस पोजीशन में  अपनी गर्दन को पहले दाएँ कुछ झुकाकर घुमाए खुछ देर रोके और फिर बाएँ घुमाए  यह क्रिया आप 5 से 10 बार करें | स्वांस लेते हुए अपनी गर्दन को झुकाए और स्वांस छोड़ते हुए वापस पहली स्थिति में आजाए |

6 मालिश करना

गर्दन के आस पास के हिस्से पर तेल की मालिश करना सर्वाइकल में बहुत आराम पहुंचता है | गर्दन से लेकर कमर के निचले हिस्से तक तेल की मालिश करनी चाहिए और हल्का गरम और ठंडा सेक करना चाहिए |

सर्वाइकल के इलाज के लिए आप अपने आस पास किसी बेहतर डॉक्टर से सलाह लेकर ट्रीटमेंट चालु करें | या हमसे संपर्क करके मुफ्त सलाह लें |

Written By :- Dr. Mohammad Mustafa

WhatsApp :- +91-9887966975

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