Sunday, April 22, 2018
Home > List of Articles > Inflammatory > स्लिप डिस्क के कारण,लक्षण और बचने के उपाय |

स्लिप डिस्क के कारण,लक्षण और बचने के उपाय |

स्लिप डिस्क के कारण,लक्षण और बचने के उपाय |

स्लिप डिस्क दोस्तों ये नाम तो आप सब ने सुना ही होगा, तो आइये जानते हैं स्लिप डिस्क 

आखिर है क्या ?

दोस्तों स्लिप डिस्क देखा जाये तो कोई बीमारी नहीं है, यह एक प्रकार की शरीर की मशीनरी में खराबी है |

अगर इस खराबी  का समय पर इलाज नहीं करवाया तो यह बहुत ही पीड़ा दायक होती है |

इस बीमारी को स्लिप डिस्क कहा जाता है, लेकिन वास्तव में डिस्क कभी स्लिप नहीं होती है ! बल्कि स्पाइनल कोड से कुछ जेलीनुमा पदार्थ बहार की और निकलता है जिसे cerebrospinal fluid या csf कहा जाता है |

स्लिप डिस्क

उपर image में आप देख रहे होंगे के स्पाइनल कोड से ये csf बहार की और निकल रहा है ! क्यूंकि डिस्क का बाहरी हिस्सा एक मजबूत झिल्ली से बना होता है |

डिस्क में मौजूद जेली connective tissues के सर्किल  से बहार की और निकल आता है और आगे बढ़ा हुआ हिस्सा स्पाईन कोड पर दबाव बनता है |

बढती उम्र के साथ यह तरल पदार्थ सूखने लगता है या अचानक झटका लगने से यह झिल्ली फट जाति है या कमजोर हो जाति है तो जेलीनुमा पदार्थ निकल कर नसों पर दबाव बनाने लगता है , जिसकी वजह से पैरों में दर्द, झनझनाहट या सूनापन होने की समस्या होती है |

भारत में लगभग २५% लोग इस बीमारी से परेशान है |

स्लिप डिस्क के कारण

इसे बहुत से कारण है जिससे यह बीमारी हो जाति है और हम उन छोटे छोटे कारणों को नजर अंदाज़ करते हैं |

  1. गलत दिनचर्या
  2. झुककर बेठना या लेटकर पढना
  3. ज्यादा देर तक कंप्यूटर पर बेठे रहना
  4. ज्यादा भारी वजन उठाने पर
  5. या झटका लगने या छोट लगने के कारण
  6. गलत तरीके से उठने बेठने के कारण
  7. सुस्त जीवन, शारीरिक गतिविधियाँ कम होने या व्यायाम न करना भी इस बीमारी को जन्म देता है |
  8. अत्यधिक थकान से भी स्पाइन पर जोर पड़ता है और एक सीमा बाद समस्या प्रारंभ हो जाति है |
  9. उम्र बढ़ने के साथ हड्डियाँ कमजोर होने लगती है और इससे डिस्क पर जोर पड़ने लगता है |
  10. 30 से 50 वर्ष की आयु में कमर के निचले हिस्से में यह problem हो सकती है, लेकिन आजकल 20 – 25 वर्ष की आयु वाले लोगों में भी यह बीमारी होने लगी है |

यह भी पढ़ें :- सर्वाइकल के कारण, लक्षण और उपचार

स्लिप डिस्क के लक्षण 

  1. नसों में दबाव के कारण कमर दर्द, पैरों में दर्द, पैरों की एडी या उँगलियों का सुन होना या पुरे पांवों में झनझनाहट होना |
  2. स्पाइनल कोड पे दबाव के कारण हिप और थाई का सुन होना या उनमे तेज दर्द या बेचैनी होना |
  3. रीढ़ के निचले हिस्से में असहनीय दर्द होना !
  4. चलने, फिरने, झुकने या सामान्य का करने में दर्द और तकलीफ महसूस होना |

उपचार के तरीके  

स्लिप डिस्क की बीमारी के उपचार के लिए सबसे पहले इसकी जांच करवानी होती है ताकी पता चल सके के कमर के निचले हिस्से का दर्द वास्तव में स्लिप डिस्क ही है या कुछ ओर तो इसके लिए doctor X -Ray , MRI करवाते है जिससे  spondilites, tumer , degeneration और metastage जैसे लक्षण भी पता लग सकते हैं |

आम तौर पर X – Ray से इसका पता नहीं चल पता है इसके लिए CT SCANE , MRI या MYELOGRAPHY या फिर स्पाइन कोड कैनन में इंजेक्शन के जरिये सही – सही पता लगाया जा सकता है की कमर की निचले हिस्से में जो दर्द है वो किस तरह का है | ज्यदातर doctor MRI दोबार करवाते हैं ताकि बीमारी का सही पता चल सके |

  • स्लिप डिस्क के मरीजों को 2 – 3 सप्ताह आराम करना चाहिए |
  • pain killer  द्वारा रोगी को आराम पहुँचाया जाता है (लम्बे समय तक दर्द निवारक दावा खाना नुकसान दायक है )
  • कुछ मामलों में steriod द्वारा आराम पहुँचाया जाता है |
  • अगर परंपरागत तरीकों से दर्द में आराम नहीं आता है तो फिर surgery ही एक मात्र उपाय है |
  • उपर बातये कुछ पॉइंट्स अस्थाई है | ये पूर्ण रूप से रोगी को ठीक नहीं करते |

लेकिन surgery का निर्णय सिर्फ एक विशेषज्ञ ही ले सकता है | Orthopedics और Neuro विभाग की जांच के बाद surgery का निर्णय लिया जाता है , आम तौर पर surgery तभी की जाति है जब स्पाइनल कॉड पर दर्द इतना ज्यादा बढ़ जाता है जब मरीज चलने, उठाने बेठने में असहनीय दर्द को महसूस करता हो, इसे मामलों में देरी नहीं करनी चाहिए रोगी को तुरंत एडमिट करना चाहिए, देरी पक्षाघात का कारण बन सकती है |

स्लिप डिस्क से बचने के उपाए 

  • लम्बे समय तक स्टूल पर न बेठें |
  • ज्यादा देर तक एक ही पोजीशन में न खड़ा रहे |
  • कोई भी काम जल्द बजी में न करे, इत्मिनान से काम करें |
  • सीढियाँ चढ़ने उतरने में सावधानी रखें |
  • एक पांव पर दूसरा पांव रखकर न बेठें |
  • पीठ के बल सोते हैं तो कमर के निचे एक टावल फोल्ड करके कर के रखें |
  • ज्यादा मोटा तकिया न लगायें |
  • झटके के साथ न उठे न बेठे |
  • पेट के बल न सोये |
  • अगर देखना हो तो सिर्फ गर्दन इधर उधर न घुमाये बल्कि पूरा घूमकर देखें |
  • बेठने का तरीका ज्यादातर कमर दर्द का कारण बनता है , लगातार 8 – 10 घंटे न बेठें ,बिच – बिच में थोडा घूम फिर लें |
  • कमर को झुकाकरन बेठें |
  • किसी चीज को उठाना हो तो कमर को न झुकाए बल्कि घुटने मोड़ कर झुक कर उठाएं |

दोस्तों ये तो था स्लिप डिस्क के कारण और बचने के उपाए! अगले article में में आपको इसके ट्रीटमेंट के बारे में बताऊंगा के किन किन चीजों से और केसे इसका इलाज किया जाता है |

WhatsApp No :- +919887966975

Doctor : Mohammad Mustafa 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

1 Shares
+1
Share
Tweet
Pin